हमें तुम पे नाज है - चेतन कुमार चीता
पूरा जिस्म छलनी हो चुका था... ग्रेनेड के धमाके में दोनों हाथ की हड्डियां भी टूट गई...दहशतगर्दों की गोलियों ने दाई आंख भी फोड़ दी... फिर भी चीते की दहाड़ कम न हुई... मौत के मुहाने पर खड़ा होने के बावजूद उसने बंदूक उठाई और एक ही गोली में लश्कर-ए-तैयबा के दुर्दांत आतंकी कमांडर अबू हारिश को ढ़ेर कर दिया।
गोलीबारी थमी तो पता चला कि कोटा का यह जांबाज बेटा मौत से जूझ रहा है। सेना के श्रीनगर बेस हॉस्पीटल ने हाथ खड़े कर दिए तो आनन-फानन में एयर एम्बुलेंस से दिल्ली स्थित एम्स के ट्रोमा सेंटर में लाया गया। जहां उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। सीआरपीएफ की 92 वीं बटालियन के कमांडेंट चेतन कुमार चीता (45) को मंगलवार की सुबह कश्मीर पुलिस ने जानकारी दी कि बांदीपोर जिले के हाजिन गांव में पाकिस्तान से आए आतंकियों ने डेरा डाल रखा है।
चीता मौका गवाए बिना 13 राष्ट्रीय रायफल और जम्मू कश्मीर पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप के साथ गांव में पहुंच गए और पारे मुहल्ले में छिपे आतंकियों को घेर लिया। जिस पर आतकियों ने गोलीबारी शुरू कर दी। चीता आतंकियों को चकमा देते हुए उनके बेहद करीब जा पहुंचे, लेकिन बाकी साथी पीछे छूट गए।
आतंकवादी को मार कर ही माने सीआरपीएफ के महानिदेशक के. दुर्गाप्रसाद ने राजस्थान पत्रिका को बताया कि आतंकियों ने चीता को निशाना बनाकर गोलियां और ग्रेनेड दागे। जिससे उनके हाथ, पैर, कूल्हे और पेट में कई गोलियां जा धसीं। एक गोली से जाबांज जवान की दाई आंख भी छलनी हो गई।
इसी बीच आतंकियों के फेंके एक ग्रेनेड में धमाका होने से चीता के दोनों हाथों में भी फैक्चर हो गया और सिर एवं चेहरे में छर्रे जा धंसे। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद इस बहादुर अफसर ने लश्कर-ए-तैयबा के दुर्दांत कमांडर अबू हारिश को मार गिराया। घायल होने के बाद भी उन्होंने 16 राउंड गोलियां चलाई थीं। हालत बेहद गंभीर गोलीबारी थमने के बाद सेना से जवान चीता को गांव से निकालकर श्रीनगर स्थित सेना के 92 बेस हॉस्पीटल में लेकर आए।
जहां इलाज का पर्याप्त इंतजाम न होने के कारण उन्हें तत्काल दिल्ली स्थित एम्स के ट्रॉमा सेंटर लाया गया। कमांडेंट के भाई प्रवीण चीता ने बताया कि हॉस्पीटल से एयरपोर्ट तक लाने के लिए रास्ते बंद कर दिए गए थे। जहां से एयर एंबुलेंस के जरिए उन्हें रात आठ बजे दिल्ली लाया गया। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन के बाद डॉक्टर उनके पेट में लगी छह गोलियां निकाल चुके हैं, लेकिन शरीर के बाकी हिस्सों में लगी गोलियां और छर्रे अभी निकाले जाने बाकी हैं। चिकित्सकों ने 48 घंटे तक हालात बेहद क्रिटिकल बताए हैं।
20 दिन पहले ही मारा था लखवी का भांजा तीन महीने पहले ही चीता की तैनाती कश्मीर में की गई थी, लेकिन इस छोटे से वक्त में ही वह आतंकवादियों के बीच दहशत का पर्याय बन गए थे। 20 जनवरी को भी बांदीपोर इलाके में आतंकियों से उनकी मुठभेड़ हुई थी। जिसमें उन्होंने मुम्बई हमलों के मास्टरमाइंड जाकिर उर रहमान लखवी के भांजे और लश्कर कमांडर अबू मुसैब को मार गिराया था।
पिता ने बढ़ाया हौसला कोटा के खेड़ली फाटक निवासी पूर्व आरएएस अफसर रामगोपाल चीता फालेज होने के कारण चल फिर नहीं सकते, लेकिन बेटे की बहादुरी का किस्सा सुन दो साल बाद बिस्तर से उठ बैठे और बोले कि मुझे अपने बेटे पर नाज है कि उसने आतंकवादियों को मार सैकड़ों मासूमों की जान बचाई है। उसे अभी और भी आतंकियों को मारना है, इसलिए जल्द ही ठीक होना होगा। मेरी दुआ है कि जब तक एक भी आतंकी जिंदा है, मेरे बेटे उनसे इसी तरह लड़ते रहेंगे।
फिलहाल चेतन की पत्नी, दोनों बच्चे और बहन-बहनोई दिल्ली में है।दुआओं का दौर शुरूजांबाज बेटे की बहादुरी और जीवन संघर्ष की जानकारी मिलते ही की कोटा में दुआओं का दौर शुरू हो गया। तमाम सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने उनके जल्द से जल्द स्वस्थ होने की कामना की है। चेतन के मित्र हर्षवर्धन जैन ने बताया कि उनके दोस्त की बहादुरी पर पूरे शहर को नाज है।
गोलीबारी थमी तो पता चला कि कोटा का यह जांबाज बेटा मौत से जूझ रहा है। सेना के श्रीनगर बेस हॉस्पीटल ने हाथ खड़े कर दिए तो आनन-फानन में एयर एम्बुलेंस से दिल्ली स्थित एम्स के ट्रोमा सेंटर में लाया गया। जहां उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। सीआरपीएफ की 92 वीं बटालियन के कमांडेंट चेतन कुमार चीता (45) को मंगलवार की सुबह कश्मीर पुलिस ने जानकारी दी कि बांदीपोर जिले के हाजिन गांव में पाकिस्तान से आए आतंकियों ने डेरा डाल रखा है।
चीता मौका गवाए बिना 13 राष्ट्रीय रायफल और जम्मू कश्मीर पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप के साथ गांव में पहुंच गए और पारे मुहल्ले में छिपे आतंकियों को घेर लिया। जिस पर आतकियों ने गोलीबारी शुरू कर दी। चीता आतंकियों को चकमा देते हुए उनके बेहद करीब जा पहुंचे, लेकिन बाकी साथी पीछे छूट गए।
आतंकवादी को मार कर ही माने सीआरपीएफ के महानिदेशक के. दुर्गाप्रसाद ने राजस्थान पत्रिका को बताया कि आतंकियों ने चीता को निशाना बनाकर गोलियां और ग्रेनेड दागे। जिससे उनके हाथ, पैर, कूल्हे और पेट में कई गोलियां जा धसीं। एक गोली से जाबांज जवान की दाई आंख भी छलनी हो गई।
इसी बीच आतंकियों के फेंके एक ग्रेनेड में धमाका होने से चीता के दोनों हाथों में भी फैक्चर हो गया और सिर एवं चेहरे में छर्रे जा धंसे। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद इस बहादुर अफसर ने लश्कर-ए-तैयबा के दुर्दांत कमांडर अबू हारिश को मार गिराया। घायल होने के बाद भी उन्होंने 16 राउंड गोलियां चलाई थीं। हालत बेहद गंभीर गोलीबारी थमने के बाद सेना से जवान चीता को गांव से निकालकर श्रीनगर स्थित सेना के 92 बेस हॉस्पीटल में लेकर आए।
जहां इलाज का पर्याप्त इंतजाम न होने के कारण उन्हें तत्काल दिल्ली स्थित एम्स के ट्रॉमा सेंटर लाया गया। कमांडेंट के भाई प्रवीण चीता ने बताया कि हॉस्पीटल से एयरपोर्ट तक लाने के लिए रास्ते बंद कर दिए गए थे। जहां से एयर एंबुलेंस के जरिए उन्हें रात आठ बजे दिल्ली लाया गया। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन के बाद डॉक्टर उनके पेट में लगी छह गोलियां निकाल चुके हैं, लेकिन शरीर के बाकी हिस्सों में लगी गोलियां और छर्रे अभी निकाले जाने बाकी हैं। चिकित्सकों ने 48 घंटे तक हालात बेहद क्रिटिकल बताए हैं।
20 दिन पहले ही मारा था लखवी का भांजा तीन महीने पहले ही चीता की तैनाती कश्मीर में की गई थी, लेकिन इस छोटे से वक्त में ही वह आतंकवादियों के बीच दहशत का पर्याय बन गए थे। 20 जनवरी को भी बांदीपोर इलाके में आतंकियों से उनकी मुठभेड़ हुई थी। जिसमें उन्होंने मुम्बई हमलों के मास्टरमाइंड जाकिर उर रहमान लखवी के भांजे और लश्कर कमांडर अबू मुसैब को मार गिराया था।
पिता ने बढ़ाया हौसला कोटा के खेड़ली फाटक निवासी पूर्व आरएएस अफसर रामगोपाल चीता फालेज होने के कारण चल फिर नहीं सकते, लेकिन बेटे की बहादुरी का किस्सा सुन दो साल बाद बिस्तर से उठ बैठे और बोले कि मुझे अपने बेटे पर नाज है कि उसने आतंकवादियों को मार सैकड़ों मासूमों की जान बचाई है। उसे अभी और भी आतंकियों को मारना है, इसलिए जल्द ही ठीक होना होगा। मेरी दुआ है कि जब तक एक भी आतंकी जिंदा है, मेरे बेटे उनसे इसी तरह लड़ते रहेंगे।
फिलहाल चेतन की पत्नी, दोनों बच्चे और बहन-बहनोई दिल्ली में है।दुआओं का दौर शुरूजांबाज बेटे की बहादुरी और जीवन संघर्ष की जानकारी मिलते ही की कोटा में दुआओं का दौर शुरू हो गया। तमाम सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने उनके जल्द से जल्द स्वस्थ होने की कामना की है। चेतन के मित्र हर्षवर्धन जैन ने बताया कि उनके दोस्त की बहादुरी पर पूरे शहर को नाज है।
Post a Comment